* निर्भय देवयांश
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सुशांत सिंह राजपूत क्या भविष्य में बॉलीवुड कैंप के कलाकारों की तुलना में बड़ा कलाकार होने जा रहा था? क्या कुछ घरानों के बच्चों से आगे निकल गया था? फिल्में अगर नहीं चल रही थीं, तो बड़े निर्माता-निर्देशक क्यों उसके साथ काम करने को इच्छुक थे? इन सवालों पर बॉलीवुड लॉबी कैसे हावी होती गयी और और अंत में उसे ही रास्ते से हटा दिया गया, जो सबके लिए खतरा पैदा कर रहा था। सबके लिए रास्ते का कांटा बनता जा रहा था।
क्या बिहारी असफलता से हार मान कर आत्महत्या कर लेता है? यदि ऐसी बात होती तो बिहार में आत्महत्याओं की बाढ़ आ गयी होती! ऐसा इसलिए कि देश के विभिन्न राज्यों की तुलना में बिहार में गरीबी और दुःख-तकलीफ अधिक होते हुए भी लोगों को अपनी मेहनत और पसीना पर भरोसा अधिक है। प्रकृति मार दे तो मार दे, एक बिहारी बद से बदतर अवस्था में भी आत्महत्या के बारे में नहीं सोचता है। यह देश का आंकड़ा कह रहा है कि बिहार में सुसाइड रेट महज 0.5 है। यानी एक प्रतिशत भी नहीं जबकि नागालैंड में 0.9 है। महाराष्ट्र में जहाँ बॉलीवुड है, वहाँ 14 प्रतिशत है। यह दर्शाता है कि बिहारियों में संघर्ष की क्षमता इतनी अधिक है कि कभी आत्महत्या के बारे में सोच भी नहीं सकता। खून में है लड़ेगा और लड़ते हुए मरेगा। पलायन नहीं, संघर्ष में मौत आए तो भी उसकी परवाह नहीं। जब भूखे-प्यासे, आर्थिक तंगी से विपन्न बिहारी की सोच में आत्महत्या नहीं है। उस माहौल से आए, अपनी मेहनत से लाखों रुपए के फ्लैट में रहने वाला, लाखों की कार में चलने वाला सुशांत सिंह इतनी आसानी से आत्महत्या कर लेगा? मुकाम जो भी मिला था उसके लिए लगभग 15 साल पसीने बहाए गए थे! कैरियर बनाने के लिए हाथ में और न जाने कितने विकल्प थे लेकिन रुचि के चलते बॉलीवुड की राह पकड़ी। मौत उस शहर का शऊर है, जानता तो कभी आता बॉलीवुड? शायद नहीं। जहाँ जिंदगी संवारने की इतनी तैयारी हो, चाँद पर जाने का ख्वाब हो, वहाँ तो दुश्वारियां भी हसीन लगती हैं लेकिन 'आत्महत्या' यह कैसे संभव है?
सुशांत सिंह की हत्या-आत्महत्या के समय की पूँजी लगभग साठ-सत्तर करोड़ रुपये की बतायी जा रही है। तत्काल बैंक में 5 करोड़ जमा पूँजी है। यह कलाकर सार्वजनिक हित में विभिन्न संस्थाओं को करोड़ रुपए का डोनेशन देता है। घर से मजबूत है। घर का अकेला लड़का है। चाचा के परिवार में एक भाई विधायक है। पढ़ने में तेज। पढ़ाई का बेहतर रिकार्ड है। बॉलीवुड में इंट्री के लिए डांस का सहारा लेता है और सीढ़ी-दर-सीढ़ी आगे बढ़ता जाता है। तो क्या बिहारियों द्वारा सपने देखना बॉलीवुड लॉबी को पसंद नहीं है? आखिर सुशांत सिंह राजपूत महज 34 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गया। जब प्रवेश किया होगा तब उम्र भी क्या रही होगी 18-20 साल के करीब? कोई गॉडफादर नहीं। मेहनत ही पहली और आखिरी गॉडफादर। कोई कैंप नहीं। लॉबी से जुड़ाव नहीं। तो क्या यह सफलता आँखों की किरकिरी बन गयी। चुभने लगी? जलन पैदा करने लगी? स्टेज पर कई बार बेइज्जती की गयी। शो में सुशांत की खिल्ली उड़ायी गयी। ये सब कभी बॉलीवुड-लॉबीवुड वालों को अपने लिए भी करना शोभा देता, तो कर लेना चाहिए था! मतलब कोई स्टार पुत्र-पुत्री कहता-रणवीर कपूर कौन है? आलिया भट्ट कौन है? करण जौहर कौन है? मजाक ही करना है न! स्क्रिप्टेड है, पहले से तैयार है तो क्यों अपने ऊपर मजाक क्यों नहीं कर सकते? करके देखो लेकिन करोगे नहीं, क्यों? इमेज खराब हो जाएगा! आखिर सुपरस्टार-डुपरस्टार के इमेज का सवाल है! उस पर कुठाराघात उचित नहीं है! बाकी पर तो सभी प्रकार की फब्तियां जायज हैं?
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