* निर्भय देवयांश
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अभी कुछ देर पहले ही तो हम चार मित्र बप्पा, सुबल, आलोक और मैं जुहू चौपाटी पर घूम-घामकर अपने निवास स्ट्रेला आंटी के पेइंग गेस्ट वाले ठिकाने पर पहुँचे थे। चारों मस्ती में एक छोड़ता तो दूसरा लय पकड़ता, फिल्म 'हम पाँच' का गाना- का जानू मैं सजनिया-चमकेगी कब चंदनिया-घर में गरीब के-उठाई ले घुँघटा-चाँद देख ले, चौपाटी पर गा रहे थे। थोड़ा-बहुत नाच सिर्फ सुबल और बप्पा रहा था। मैं और आलोक स्वर और ताली दे रहे थे। चूँकि बप्पा और सुबल कैमरामैन, सो दोनों के पास मस्तियाँ कुछ अधिक थीं। इसी बीच, सुबल सिगरेट लाने बाहर निकल गया फिर से वहीं चौपाटी पर। निवास से चौपाटी का एक मिनट का रास्ता। हम तीनों बातचीत में मशगूल हो गए।
काफी देर बाद तक जब सुबल नहीं आया तो हमें चिंता होने लगी कि क्या हुआ? 1990 का दशक था। मोबाइल आया नहीं था। बप्पा ने कहा - चल बाहर देखते हैं। चौपाटी के यूनिटी कम्पाउंड निवास से निकले तो पता चला कि आपका दोस्त भाई के गैंग के हत्थे चढ़ गया। हम तीनों ने कहा कि हमें भी वहाँ ले चलो। उस आदमी ने कहा कि वहाँ कोई नहीं जा सकता है। मालकिन स्ट्रेला आंटी जो अपने समय की मशहूर वेश्या थीं। दर्जनों दीवाने थे उनके। उनमें से एक दीवाने की दी जमीन पर कामचलाऊ घर बनाकर जुहू के यूनिटी कम्पाउंड में रह रही थीं। स्ट्रेला आंटी तब बूढ़ी हो चली थीं। उनका पुत्र सुकेश ने भी एक वेश्या से ही शादी की थी। दोनों की जोड़ी बहुत प्यारी थी। सुकेश हीरो माफिक लगता था। सुबल के अपहरण की खबर सुन स्ट्रेला आंटी बेचैन हो गयीं। यह कैसे हो सकता है मेरे पेइंग गेस्ट के साथ। यूनिटी कम्पाउंड के बाबा, यह बाबा शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा और अमिताभ बच्चन का करीबी था। दोनों की फिल्मों में बाबा साथ-साथ देखा गया है। बाबा की लंबाई भी बिग बी की तरह ही थी। कम्पाउंड के खुले मैदान में प्रख्यात संगीतकार सरदार मल्लिक (जाने -माने संगीतकार अन्नू मल्लिक के पिताजी) और विख्यात गीतकार कमर जलालावादी आपस में गुफ्तगू कर रहे थे। इन दोनों के पुराने मकान यूनिटी कम्पाउंड में थे। बाबा ने हम तीनों से पूछा-पूरी घटना बताओ। हमने चौपाटी पर उस दिन जो-जो हुआ था, सबकुछ बता दिया। बाबा ने स्ट्रेला आंटी को कहा-मदर अभी देखता हूँ।
1990 का दशक। देश में उदारवाद अभी आना शुरू हुआ था। सरदार मल्लिक को अपने मंझले पुत्र अबू मल्लिक की डांस कोचिंग में जाते देख मैं कमर अंकल के पास पहुँच गया। उनसे मेरा परिचय हो गया था। ये तीनों मेरे मित्र अपने में सिमट कर रहने वाले थे। करीबियों के बीच ही हँसी-ठहाका। मेरी दोस्ती हम उम्रों से कम बुजुर्गों से गाँव से लेकर मुंबई और अब साहित्य में भी अधिक रही है। अभी हिंदी साहित्य के लगभग जितने भी 80 वय पार साहित्यकार हैं उनके साथ मेरी प्रायः बातचीत होती है। कोलकाता में 80 पार लेखक गण कोई बड़े भाई तो कुछ चाचू हैं। चाचू बहुत कम हैं एक-दो।
कमर अंकल ने कहा कि तुम लोगों की गतिविधियां तथाकथित स्थानीय आकाओं को खटकी होंगी इसलिए यह घटना घटी। आए दिन जुहू चौपाटी में ऐसी खबरें सुनने को मिलती हैं। तुम्हारी मालकिन दबंग महिला हैं। मैं पूछा-उसे कुछ होगा तो नहीं? बूढ़े हो चुके कमर अंकल ने कहा-देखो क्या होता है। कमर अंकल के लिखे गाने अमर हैं- मेरा नाम चिन चिन चू-रात चाँदनी मैं और तू-हैलो मिस्टर... आदि आदि। 'हावड़ा ब्रिज' को देखते यह गाना याद आ जाता है। फिर हम तीनों मिलकर दूसरे-तीसरे-चौथे लोगों से पूछने लगे कि ये भाई कौन हैं। मुंबई में कितने भाई हैं। इस भाई के ऊपर भी कोई भाई है क्या? जिनसे पूछते वही आँख दिखाता- भाई के बारे में बोलने का नहीं। समझा क्या!
रात के दस बजने वाले थे। बप्पा और आलोक ने मुझसे कहा-तुम भी देखो। भाइयों से तेरी पहचान हल्की-फुल्की है। मैंने कहा- भाई के गुर्गे से पहचान है यार। नाम जीतू भाई। जीतू भाई, भाई का शूटर था। महीनों से बीआर चोपड़ा-रवि चोपड़ा के बंगला के ठीक सामने के बनारसी होटल में मिलने पर चाय साथ-साथ लेते थे। जीतू भाई तसीली-वसूली में लगा था। इस घटना के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी। मैंने उसे कहा कि जीतू भाई उसे छुड़ा कर लाओ। बाबा और स्ट्रेला आंटी भी वहाँ पहुँच गयीं जहाँ हम तीनों उससे बात कर रहे थे। जीतू आश्वस्त कर गया कि तुम सभी अड्डे पर जाओ-हम देखते हैं, चिंता न करो। आधे घन्टे बाद सुबल जीतू भाई के साथ आया। बाबा और स्ट्रेला आंटी उससे पूछ रहे थे-क्या हुआ रे सुबल-बता बता। बाबा बोला-अरे मुंबई में यह सब होता रहता है।
जीतू भाई ने मुझे बाहर बुला कर कहा-दरअसल सुबल के बाल बड़े हैं। कान में कनबाली है। जोर-जोर से तुम लोग गाना गा रहे थे। भाई के गुर्गे को लगा कि तुम लोग भी मस्तान माफिक हो। मैंने कहा-यार जीतू भाई। मुंबई में यह सब? उसने कहा-आगे से ये सब करने से बचो। वैसे मुझसे जान-पहचान है तो कोई बात नहीं। लेकिन शांति से जुहू चौपाटी पर घूमो-टहलो।
अड्डे पर आया तो सुबल डरा-सहमा था। रोने के माफिक। सब उसके चेहरे को देख रहे थे। स्ट्रेला आंटी भाई के मदर-फदर को अपनी भाषा में आशीर्वाद दे रही थीं । बाबा आंटी से मजाक कर रहा था। कमर अंकल अपनी यूनिटी कम्पाउंड में बेटी के घर से अपने घर के लिए जा रहे थे। पेइंग गेस्ट के सभी मित्र आ गए थे। नरेंद्र सतीश कौशिक का सहायक था। राजा खान अभिनेता। राजेश सिंह पंजाब वाला महेश भट्ट की कंपनी में काम करता था। नरेंद्र ने कहा-अब खाना बनाने में जुट जाओ। बप्पा और आलोक ने अंडा, आलू, चावल को मिलाकर डिश तैयार किया। अगले दिन से जुहू चौपाटी जाना बंद। समय मिलने पर हम सभी किशोर कुमार गांगुली मार्ग के हनुमान मंदिर जाने लगे। ... का जानू मैं सजनिया गाना पता नहीं अब मेरे मित्र गाते भी होंगे कि नहीं। बॉलीवुड की हलचल में यह घटना भी याद आ गयी। राजा खान असम लौट गया। बप्पा दारू पी पी कर मर गया। सुबल मुंबई में है। नरेंद्र भी। आलोक गुवाहाटी में अफसर बन अफ़सरगिरी कर रहा है और संपर्क पूरी तरह से तोड़ चुका है।
सुबल ने मुझसे कहा-तुम जब तक इधर को रहेगा, हम रहेगा। तुम्हारे जाने के बाद कहीं और चला जाएगा। सभी मित्र अलग-अलग भटक गए। मैंने 1996 में मुंबई छोड़ दिया। हम समझ सकते हैं सुशांत सिंह राजपूत के फैलाव से कितने आकाओं को परेशानी होती होगी। उसके हाथ का फैलाव कितना बड़ा था-महेंद्र सिंह धोनी माफिक!
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