* निर्भय देवयांश
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बॉलीवुड में नशा कैसे चढ़ता है यह कोई अनुराग कश्यप जैसे निर्माता-निर्देशकों से सीखे। अब उसके साथ 'गैंग्स ऑफ वासेपुर, 'उड़ता हुआ पंजाब' है। बॉलीवुड में अब वह आउटसाइडर नहीं रहा। उसके पैर जम गए हैं। अनुराग ने मुझसे बातचीत में 2004-2005 के दौरान कहा था कि हाँ, आउटसाइडर के लिए मुंबई फिल्म उद्योग आसान नहीं है। बहुत संघर्ष करना पड़ता है। यहाँ भी भाई-भतीजावाद है। मैंने भी अपना अनुभव अनुराग के साथ शेयर किया था। अब जब करण जौहर के साथ 'कॉफी विद करण' में शामिल होने और मिलने-जुलने का मौका मिलने लगा तो वह 'प्रिविलेज्ड क्लास' के पावर का खुद नशेड़ी बन गया। दर्शक को यकीन था कि यह आदमी सच्चा नहीं हो सकता, इसलिए अनुराग के बड़े बजट की फिल्म 'नो स्मोकिंग' भयंकर रूप से फ्लॉप साबित हुई थी। जान अब्राहम के कैरियर पर उस फिल्म की असफलता का बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। काफी दिनों तक जान को फिल्म का ऑफर तक नहीं मिला था।
बॉलीवुड में आउटसाइडर टिकने के लिए पहले लॉबी ढूंढता है। बिना उसके टिकना मुश्किल है। सुशांत सिंह राजपूत धारावाहिक से बड़े पर्दे पर गया तो उसकी चुनौती और भी बड़ी थी, क्योंकि छोट पर्दे से आए लोगों को बड़े पर्दे वाले कलाकार आसानी से स्वीकार नहीं करते हैं। बड़े पर्दे की लॉबी में इंट्री भी आसानी से नहीं मिलती है। कुछ घरानों को छोड़कर किसी और के लिए वहाँ जगह नहीं होती है। चूँकि अनुराग ने पहले 'प्रिविलेज्ड क्लास' के नाम पर करण जौहर, अभिषेक बच्चन आदि के खिलाफ माहौल बनाया और मौका मिलते खुद को वहाँ फिट कर लिया। इसलिए आज उसे सुशांत सिंह राजपूत के पक्ष में बोलने में परेशानी हो रही है। बोलने पर अनुराग का खतरा बढ़ जाएगा और मजबूत लॉबी से नाता टूट जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि आदित्य चोपड़ा और करण जौहर का साथ दे और 'कॉफी विद करण' की चुस्की लेते रहे।
पिछली पोस्ट में ही अनुराग के छोटे भाई 'दबंग' फेम निर्देशक अभिनव कश्यप ने लहक से बातचीत की थी। अभिनव कश्यप का खुलेआम कंगना रनौत, सोनू निगम को समर्थन है। ये लोग खुलकर बॉलीवुड लॉबी के खिलाफ बोल रहे हैं। भविष्य के खतरे मोल रहे हैं। इन्हें भारी कीमत चुकानी होगी। कहीं काम नहीं मिलेगा। अभिनव कश्यप ने तो कहा भी कि अभी हालात ठीक नहीं है। यहां तक कि सरवाइवल के लिए एक दुकान खोल लेंगे या ऑटो चलाएंगे लेकिन झुकेंगे नहीं।
अनुराग अपने कैरियर के सामने कुछ भी नहीं देख रहा है। छोटे भाई की अवस्था ठीक नहीं है लेकिन मदद के लिए कभी हाथ नहीं बढ़ाया। जबकि अनुराग अपने बैनर में दूसरे निर्देशकों को अवसर देता है। अपने छोटे भाई को क्यों नहीं? यह एक सवाल अपनी जगह कायम है। अभिनव ने लहक के इस प्रश्न का जवाब सही ढंग से नहीं दिया कि बड़े भाई से स्पोर्ट क्यों नहीं लेते? सिर्फ इतना ही कि घर का मामला है। जब ऐसी नौबत आएगी तब घर के अंदर ही बात कर लेंगे। यह विचित्र है कि अनुराग कंगना रनौत को डराने के लिए सुशांत सिंह राजपूत जैसे अंत की बात ट्विटर पर कर रहा है। दूसरी तरफ छोटा भाई ट्विटर पर बॉलीवुड लॉबी के खिलाफ मुखर है।
जो हालात पैदा हुए हैं उससे एक बात तो साफ है कि सुशांत सिंह राजपूत के मामले को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। ऐसा होने पर बॉलीवुड लॉबी बच जाएगी और अनुराग कश्यप जैसे लोग खुद को सुरक्षित बचा ले जाएंगे। छोटे भाई और आउटसाइडर कंगना रनौत, सोनू निगम जैसों की दुश्वारियों से अनुराग को क्यों चिंता होने लगी। नशा तो आखिर नशा है, चढ़ता ही जाता है।
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