#दुनिया में मानिंद #पूजनीय नहीं #निंदनीय हैं
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गलतफहमी न होती तो कोई मानिंद न होता
स्वार्थ की वासना की पूर्ति की ललक मस्तिष्क की नसों में
तूफान नहीं लाती तो किसी की हत्या न होती
यह सोचने के पहले आदमी खुद आत्महत्या कर लेता
धरती पर फिर कभी दूसरी हत्या की खबर सुनी नहीं जाती
लोग एक दूसरे से पूछते कि हम जहाँ रह रहे हैं
कहीं वही तो स्वर्ग नहीं है
इससे बढ़कर स्वर्ग होगा भी क्या
जहाँ वर्चस्व की बाँसुरी कुत्ते, गधे, सूअर के लिए नसीब नहीं है
इन जीवों जानवरों से अधिक अतिरिक्त सुविधा
मनुष्य के लिए भी जब तय नहीं थी
फिर अफवाहों, वहमों, झूठ-फरेब की मायावी दुनिया
क्यों रची गयी होगी, रची गयी आखिर
जब कोई किसी भी समस्या के लिए जवाबदेह नहीं है
हर आदमी को अपने दिल पर हाथ रखकर पूछना होगा
सुकरात के जहर पीने में तुम्हारा कितना जहर पीना हुआ
बुद्ध द्वारा सत्ता को लात मारने में तुम कितने शामिल हो
जब ये सवाल हमारे नहीं हो सकते हैं
इन सवालों में हमारी कोई हिस्सेदारी नहीं है
तो जब मानिंद बनेगा या बनाया जाएगा
उसमें हम अपनी मूर्खता की नाप-तौल करेंगे कि नहीं
अपनी नपुंसकता की कद काठी नापेंगे कि नहीं
अपनी बौद्धिकता की छिछली समझ
जो किसी वेश्या के शरीर से भी कम पवित्र है
उसे किस आधार पर मानिंद होने देंगे
मान लेने में किसका पर्दाफाश होगा
जो हो गया मानिंद उसका
न कि जिसने मान लिया है
भूख आज भी जब अपने से बात करती है
उसे हँसी आती है उन आत्माओं - परमात्माओं पर
जिन्हें चलाए, दौड़ाए, हलवाहे की तरह खटाए बिना
स्थापित कर दिए गए हैं
यह सब जिस किसी ने किया
किस उद्देश्य से किया होगा
किस रहस्य के वशीभूत होकर किया
हम उसे कब बेनकाब करेंगे
आम आदमी जिसकी रोटी पसीने से भींग जाती है
और नमक का स्वाद समझ उसे खा जाता है
उसकी अतरियों के इन सवालों का जवाब कौन देगा
हजारों विचारधाराएं पैदा की गईं
खून खराबा हुआ, करोड़ों लोग मारे गये
मगर सुविधाओं के साथ बलात्कार का अधिकार
और उससे मिलने वाले मजा कुछ लोग क्यों
अपने पास रख लिए हैं
अभी तक रखे हुए हैं
क्या इस पर अब तक किसी ने चर्चा क्यों नहीं की
क्या इन गुनहगारों की पहचान में दिक्कत है
उससे टकराने में भय है
उसके हाथ से मख्खन छीन लेने की शक्ति नहीं है
ऐसे में उन कोखों की होने वाली संतानों के सामने
हम मानिंद का परिचय कैसे कराएंगे
उसे कैसे बताएंगे कि यह जन्मजात राजा है
और हमें सदा गुलाम बनकर रहना है
तो बच्चे जब यह सवाल पूछेंगे कि
जब सबकुछ माताओं पिताओं को पता था
उत्तर दक्षिण, पूरब पश्चिम के इतिहास भूगोल तक
पर कोख के साथ मजे के लिए यह धंधा क्यों किए
इरादा सिर्फ मजा था और है तो याद रखना जरूरी है
इतिहास इस धंधे को सबसे गंदा और गलीज धंधा घोषित कर अपने पन्ने को सदा के सफेद छोड़ देना पसंद करेगा
अरे पागलों की संतानों अपने माताओं-पिताओं का बदला
अपने उन संतानों से क्यों लेना चाहते हो
जिसे ताउम्र रोटी पर नमक तक नसीब नहीं है
वो महलें, वो सुंदरियों, वो तिजोरियों पर जब
विचारधारा के बलात्कारियों की बपौती है
फिर नाजायज पैदाइश को कैसे परिभाषित करेंगे हम
क्या इसके अब तक किसी शास्त्र की रचना की है
संविधान की किसी धारा में इसका जिक्र है
संसद में अब तक सबसे गलीज मजा के लिए संवाद हुआ
जब कुछ करने के लायक नहीं हो नालायकों
भूखे पेट ही सही कहो जो मानिंद हैं पूजनीय नहीं हैं
निंदनीय हैं
निंदनीय हैं
निंदनीय हैं
#फकीर
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