Wednesday, 20 May 2020

निर्भय देवयांश की कविता

#जब बार- बार #आएगा #कोरोना 
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आखिर हम अकेले हो ही गये प्रिये 
साथ आए थे ही क्यों जब मिलन में दुश्वारियां थीं 

क्या सूर्य ने घासों को 
चाँद ने फूलों को 
करीब आने से इसीलिए तो नहीं रोके रखा 
ज्यादा पास आना
एक दूसरे के मिजाज में खलल है 
बेहतर है दूर रह कर 
चाहे जितना फूलों फलों
इनके भी अपने लार होते हैं
मजा मगर दूर से लेते रहे

आदमी जो कि इंसानियत से सदा दूर रहकर 
आखिर क्यों सूअर स्वार्थ में गंधाता रहा 
एक दूसरे के चुम्बनों में सराबोर हो 
मोक्ष पाने की जिद कर बैठा
जबकि तय था बहुत दूर रहो
जज्ब करो इंसानियत महसूसी है
करीब आने से जैसे स्वार्थ में टकराहट 
चूर चूर कर देने की चुनौती
लैला मजनू, रोमियो जूलियट के किस्से
कोरोना के बनाए तो हैं नहीं
कमिनगोई की आवारगी के लिए 
जब दोपाई आदमी खुद को जिम्मेवार नहीं ठहराएगा
कोरोना को ऐसी जलालत भरी हरकत से क्या लेना देना 
उसे तो किये की सजा देनी है 
खूब मजे लेकर 

यह सूअर संतुष्टि ने तय किया 
विचारधारा में संगठित होकर आदमी विकास करता है
लूट खसोट के जरिए वजूद बनाता है
औरों से अलग होकर बुद्धिजीवी कहलाता है
करीब से देखने पर 
जिसके पास सूअर सुविधा के अलग अलग अंदाज हैं
उसे जब कोई आदमी कहता है
तो खुद के आदमी को ही गाली देता है
सूअर सुविधा विकास का तकाजा है 
यह किसने तय किया है करुणा ने 
या कोरोना ने

यही विचारधारों ने तो संगठित होकर कत्लेआम किए 
बलात्कारियों ने इंसानियत की इज्ज़त तार तार किए
सामाजिकता के सिद्धांत जब गढ़े गये तो उसमें 
यह क्यों नहीं बताया गया कि कोरोना जैसे रोग को पैदा करना
आदमी की लम्पटगिरी है
विज्ञान की बेहयाई
पूंजी की नंगई है

बुद्धिजीवियों की बेहद नंगई का पर्दाफाश
सिद्धांत, विज्ञान, विकास का खुलासा जब 
कोई रोग कोरोना करे
फिर यह तय किया जाए 
अब सामाजिक सरोकार को बचाए रखने के लिए 
दूर दूर रहो
पास न आओ
चुम्बन न खाओ
सोए को जगाने के लिए 
थाली न हो घर में 
दो हाथ है उसी से ताली बजाओ

ऐसा करते वक्त ईश्वर 
आदमी के सूअर स्वार्थ से पैदा हुआ कोरोना का तांडव देखेंगे
वैज्ञानिक संभव हो हाइड्रोजन बम से भी खतरनाक
कोई बम बनाकर कोरोना को सबक सिखाएंगे
कलाकार व्यवसाय करेंगे
पूँजीपति चाँद पर घर बनाने का सूअर सपना देखेंगे 

कोरोना बार बार आएगा 
सूअर सुविधा से लतपथ होते मनुष्य के होश को 
ठिकाने में लाने के लिए जलवा दिखायेगा
ईश्वर के प्रतिनिधि बनकर आए कोरोना से 
कुछ भी सीख लेकर आदमी 
जीव जंतुओं के प्रति नफरत छोड़ 
थोड़ी भी करुणा पैदा कर सके
सूअर स्वार्थ में खाने में मजे के लिए
सांपों, बिच्छू, बिल्लियों को आहार न बनाएं
फिर ईश्वर भी सहमे नजर आएंगे
दोपाई जानवर मनुष्य से प्रकृति की इज्ज़त की उम्मीद
शायद बेमानी न हो

ईश्वरों को उम्मीद है
आदमी शायद कभी न कभी 
आदमी बनकर दिखाएगा 

आदमी को आदमी होने के 
कुछ मौके और दिए जाएं
इसके लिए भी थाली पीटने, 
ताली बजाने की जरूरत है। 
    #फकीर

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