Tuesday, 19 May 2020

निर्भय देवयांश की कविता

#प्रकृति की #परीक्षा लिए तो
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#सिकंदरों को भी जब प्रकृति चकनाचूर कर रही थी,
पूछ रही थी कैसे समझ लिए दुनिया तेरे बाप का माल है

चेतो नहीं तो रौंद कर मारुँगी 
सर पर पहाड़ पटक दूँगी
दो चार ग्राम का दिमाग क्या दे दिया 
सूअर, प्रकृति को बुलडोज करने लगे
कुत्ते, तुम्हारी विचारधारा, उन्नति, विकास, विज्ञान
पेड़ पौधे, जंगल, समंदर, नदी नाले सबके दुश्मन हैं

बता तू प्रकृति की कैसे हितैषी है
मानव योनि की बिगड़ैल #सन्तानें?
             फकीर

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