Sunday, 24 May 2020

दुःखी चेहरे से नफरत की बात समझ में आती है

दुःखी चेहरे से नफरत की बात समझ में आती है
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कोख के गणित को कभी किसी मूर्ख से पूछकर देखने से
पता चलता है उसे ज्ञात नहीं
किस रहस्य की बात की जा रही है
नफरत ऐसे लोगों की पैदाइश में है
हम कहते नहीं है इसलिए कि
जब कभी हम तंगहाल होंगे तो तलाश की जाएगी
उन कोखों की जो हमारे जन्म के कारण हैं
अमीरी की सबसे बुरी लत है
उसके पास गालियाँ सिर्फ कमजोरों के लिए हैं
कभी कभी अपने कुकर्मों को गाली दी जा सकती है
कोई आगे आए तो सही उसका इतिहास बनेगा
एक अमीर ने अपनी अमीरी को गाली दी है

सुख से हरे भरे चेहरे को देखकर
दुःखी आदमी नफरत नहीं करता है
उसे आता नहीं है यह सब करना
भूखे पेट से नफरत पैदा होती तो
अभी इतिहास के पन्ने पर शासकों के चित्र,
राजा की वंशवलियां नहीं होतीं
सूनी माँग होती 
विधवा विलाप से सराबोर माहौल

दुःखी चेहरे किसी भी संविधान के लिए गहरे घाव हैं
सभ्यताएँ मिट जाए तो भी नफरत नहीं मिटती है
इन्हें ताउम्र रोना है
अकाल मौत में छिपी मुस्कान के साथ

यह आश्चर्य है
उदासी में हँसना कोई इनसे सीखे
जो कई दिनों से भूखे प्यासे हैं...

                 *फकीर 


        

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