Wednesday, 12 August 2020

जबलपुर बॉय :: बॉलीवुड की "अश्लील गलबहियां" सिर्फ अश्लीलता को बढ़ावा देती हैं... 'भूतनाथ' फेम निर्देशक विवेक शर्मा ने लहक से कहा...


* निर्भय देवयांश
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 सुशांत सिंह राजपूत की हत्या-आत्महत्या कांड के बाद बॉलीवुड वाले काफी सतर्क हो गए हैं। फूंक-फूंक कर, नाप-तौल कर बोल रहे हैं। कदम-कदम पर खतरा है। एक गलत बयान यानी बॉलीवुड लॉबी की नजर में किसी का कैरियर हमेशा के लिए बर्बाद कर सकता है। दिशा सालियन हत्याकांड की कीमत सुशांत सिंह राजपूत की जान से वसूली गयी है। यह एक घटना ही तो थी। ऐसे बयान देने वाले सभी शूरवीर चुप हैं। बोलते हैं तो बॉलीवुड लॉबी के पक्ष में, वर्ना चुप रहना अभी अभिनय क्षेत्र में बने रहने के लिए बेहतर खुराक है। जीते रहे तो लाख उपाय की सोच की आँधी बह रही है बॉलीवुड में। 

 जबलपुर वाले 'भूतनाथ' फेम निर्देशक विवेक शर्मा थोड़ा-बहुत बॉलीवुड वाले से अलग हैं। जो कुछ भी कहना होता है, कह देते हैं। कहने से उन्हें गुरेज नहीं है। नतीजा जो भी, उसकी चिंता भाई-भतीजावाद वालों की तुलना में कम करते हैं। बॉलीवुड के ताजा हालात पर जारी उठापटक के बीच विवेक शर्मा ने लहक से बातचीत में कहा-बॉलीवुड की 'अश्लील गलबहियां' सिर्फ अश्लीलता को बढ़ावा देती हैं। कुछ लोगों के इस मजा और फायदे से दर्शक को कुछ भी लेना-देना नहीं है। आमजन पर कुसंस्कृति थोप कर कहेंगे कि यही मांग है। यह पूरी तरह से गलत है। यह सच्चाई नहीं है कि आमजन अश्लीलता चाहते हैं। परोसने वाले अपनी सोच को दर्शक पर लादते हैं। 

लहक के इस सवाल पर कि बॉलीवुड में परिवर्तन कैसे संभव है? विवेक शर्मा ने दो टूक लहजे में कहा कि पारदर्शी लोगों को फिल्म निर्माण में धन लगाना होगा। यदि इनके वर्चस्व को धत्ता बताना है तो समानांतर आर्थिक फंड तैयार करना होगा। बिना इसके आप अच्छी सामाजिक फिल्म जो सर्जनात्मक है, सार्वजनिक हित में है, नहीं बना सकते हैं। इसके लिए मजबूती से पहल करनी होगी। जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक बॉलीवुड पर पहले से काबिज लोग अपनी मनमर्जियां करते रहेंगे और दर्शक अपनी रुचि को हिंसात्मक बनाकर समाज को कलंकित करते रहेंगे। विवेक शर्मा के अनुसार आखिर मामला वर्चस्व तोड़ने का है तो उसके लिए वैसे ही लोगों को आगे आना होगा जो फिल्म निर्माण को सामाजिक कार्य मानते हैं। 

 विवेक शर्मा ने जीतोड़ मेहनत कर बॉलीवुड में साफगोई के साथ अपनी जगह बनायी है। 1992-93 में फिजिक्स में एमए की पढ़ाई करने के बाद मुंबई पहुँच गए। जेहन में यह बात सदा बनी रही कि छोटे शहर से हैं। घर-परिवार का कोई फिल्मी नाता नहीं है। नाता यही है कि पांचवीं कक्षा से ही कहानियां उनके मन-मस्तिष्क में घूमने लगीं। मौका मिलते ही विवेक मुंबई पहुँचे और सहायक निर्देशक के तौर पर महेश भट्ट के साथ सफर की शुरुआत की। 'चाहत', 'डुप्लीकेट', 'फिर भी दिल है हिंदुस्तानी' आदि दर्जन से अधिक फिल्मों में महेश भट्ट के सहायक रहे। यहीं पर काम करते हुए उनकी शाहरुख खान, जूही चावला, अक्षय कुमार, मिथुन चक्रवर्ती आदि-आदि से परिचय बढ़ा। 

विवेक ने सभी से अपने ढंग से रिश्ते प्रगाढ़ किए। जैसे कि वह जूही चावला को 'जूही मां' कहते हैं। शाहरुख खान को 'शाह खान' और अमिताभ बच्चन को 'दादा'। विवेक के यह अलग रिश्ते का अंदाज ही है कि जब भूतनाथ फिल्म की कहानी लिख रहे थे और अपनी पसंद की कलाकारों से मिल रहे थे, तो सभी ने उन्हें प्रोत्साहित किया। अमिताभ बच्चन उर्फ दादा, जूही मां और शाह खान तीनों ने अपनी सहमति दे दी। 2008 में बनी यह फिल्म आज भी दर्शकों में अच्छी पहचान लिए हुए यादों में जिंदा है। 2009 में विवेक ने 'कल किसने देखा' फिल्म बनायी। बताते चलें कि बड़े कलाकारों ने 'भूतनाथ' के निर्माण में यथासंभव सहयोग किया। 

विवेक शर्मा ने एक नया प्रयोग करते हुए अपनी अलग कंपनी बना डाली। नाम रखा है-"फिल्मजोन"। इस बैनर के तले इसी वर्ष (2020) एक फिल्म रिलीज की गयी-'ए गेम कॉल्ड रिलेशनशिप'। यह फिल्म 14 फरवरी यानी वेलेंटाइन डे को रिलीज हुई। लगभग 600 सौ बड़े- छोटे सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई। अच्छा रिस्पांस मिला। वर्तमान में विवेक कोरोना काल में मिले समय का भरपूर सदुपयोग कर रहे हैं। तीन फिल्म पर एकसाथ काम कर रहे हैं। संभावित फिल्म क ख ग घ ड़ है। इसमें अमिताभ बच्चन को लेने की योजना है। एक दौर की बातचीत भी  हुई है। दूसरी फिल्म 'राम सिंह' और तीसरी है 'लंगड़ा'। इनके अलावा भी फिल्मों की कहानी विवेक द्वारा लिखी जा रही है। लॉक डाउन के बाद जब सब कुछ सामान्य हो जाएगा तो फिल्म निर्माण का काम आगे बढ़ेगा। 

 अब चूँकि विवेक को बात करते-करते भूख लग गयी। घर से बाहर जाकर बादाम लाना, फिर पोहा बनाना है। फिर पानी-पूरी का मजा। बैचलर विवेक को खुद पोहा बनाना है। मैंने भी कहा-बना लो भाई, खा लो भाई-अपनी जिंदगी है जी लो भाई। विवेक की फिल्म की तरह---'कल किसने देखा'। 

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