Saturday, 8 August 2020

संजय दत्त गर 'ड्रगिस्ट-स्मैकियर' है तो पसंद है लेकिन बिहारी सुशांत सिंह राजपूत का तथाकथित 'डिप्रेशन अनपच' हो गया... " कि जान ही ले लिए आखिर "?


* निर्भय देवयांश 
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 खानदान-वानदान के बच्चों के लिए कितनी छूट है जीवन की राहों पर। दूसरे-तीसरे के लिए यह सुविधा नहीं है क्योंकि वह बिहार से कुछ सपने लेकर उस मायानगरी में आता है, जहाँ न्यूरोटिक संजय दत्त हर हाल में अपने लोगों द्वारा अपनाया जाता है। स्वीकार किया जाता है। उसके जेल जाने पर मित्र-मंडली वहाँ मिलने जाती थी। जेल में साप्ताहिक मिलना-जुलना था। सभी मिलने के लिए मौके की तलाश में रहते थे। इस न्यूरोटिक को तरह-तरह के नाम दिए गए। बाबा, संजू बाबा, और न जाने क्या-क्या? इतना ही नहीं, इमेज चमकाने के लिए बायोपिक भी 'संजू' नाम से बनायी गयी। आखिर यह फर्क इतना बड़ा कैसे और क्योंकर बॉलीवुड द्वारा मंजूर किया गया? इसलिए तो नहीं कि सुनील दत्त और नरगिस का पुत्र ठहरा? अगर यह प्रमाण-पत्र है तो बहुत अच्छा संकेत नहीं है कला की तथाकथित दुनिया में। सुशांत सिंह राजपूत मायानगरी में किसी के रहमोकरम पर नहीं गया था। उसे भरोसा था कि उसमें कला है और उसके प्रदर्शन के लिए फिल्म उद्योग ही एकमात्र जगह है। भला किसी भाई-भतीजावाद से जुड़े बॉलीवुड के बच्चों ने भी उतनी मेहनत की, जितनी सुशांत ने की? ठीक है भाई कि यह तुम्हारी खेती है, तुम जैसे चाहो इसे रौंदो। इसके लिए जरूरी है कि देश में एक कानून ही बना दिया जाए कि बॉलीवुड कुछ लोगों की जागीर है और छोटे शहर के लोग वहाँ सपने लेकर न जाएं। यदि गए तो सपने तो कुचले-मसले जाएंगे ही। जान भी खींच ली जाएगी। नग्न कर बहुमंजिली इमारत से फेंक दिए जाएंगे। तुम्हारा नाम कुछ भी हो सकता है-दिव्या भारती, दिशा सालियान, जिया खान? हत्या कहीं भी की जा सकती है? 

1990 के दशक में मुंबई के जुहू चौपाटी के जिस यूनिटी कम्पाउंड में मैं अपने स्ट्रगलर मित्रों के साथ स्ट्रेला आंटी के पेइंग गेस्ट के तौर पर रहता था। यह ठिकाना संजय दत्त का तब स्थायी ठिकाना हुआ करता था। वजह ड्रग सेवन। कई स्मैकियर स्ट्रेला आंटी के रहमोकरम पर चौकी के नीचे रात में सोते थे। ये सभी संजय दत्त के ड्रग सेवन के दोस्त थे। दो स्मैकियर मेरे बेड के नीचे भी सोता था। स्ट्रेला आंटी से जब मैंने शिकायत की कि यह ठीक नहीं है। दूसरे पेइंग गेस्ट इस माहौल में रह सकते हैं लेकिन मैं नहीं। प्यारी स्ट्रेला आंटी ने तब अपने आंगन में शेड दिलवाकर स्मैकियरों के लिए रहने की व्यवस्था करवा दी थीं। स्ट्रेला आंटी के यार जो कि चलने-फिरने से लाचार थे, ने मुझसे कहा- ये सभी संजय दत्त के दोस्त हैं। तुम क्यों नहीं मिलजुल कर रहते हो। कभी काम ही आ जाए। मैंने कहा-अंकल, मैं जीवन में इस तरह की शर्तों को ठोकर मारता रहा हूँ। समीकरण की जिंदगी मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। 'ऐसा करेंगे तो ऐसा होगा', यह समीकरण सब पर फिट नहीं हो सकता? तभी स्ट्रेला आंटी आ गयीं और यार से खसम बने अंकल को दो-चार गाली करीने से दीं। अंकल के होश जो ठिकाने आए कि फिर कभी कोई सलाह नहीं दी।

संजय दत्त, सैफ अली खान, विद्या बालन, जब प्रदीप सरकार निर्देशित फिल्म 'परिणीता' की शूटिंग 2004-2005 में कोलकाता में कर रहे थे तो मेरी अक्सर मुलाकात होती थी। मैं दैनिक जागरण में राजनीति के साथ-साथ कला-संस्कृति का भी रिपोर्टर था। पहली मुलाकात में ही मैंने संजय दत्त से कहा कि मुंबई में मैं स्ट्रेला आंटी का पेइंग गेस्ट रहा हूँ 7 साल, तो जवाब मिला कि तब तो आप मेरे बारे में बहुत कुछ पहले से जानते हैं। स्ट्रेला आंटी के लिए संजय के मन में आदर दिखा। निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने शूटिंग के लोकेशन पर भी बुलाया। समयानुसार विक्टोरिया भी एकाध बार गया। कोलकाता के विभिन्न इलाकों में फिल्म की शूटिंग हुई थी। एक दिन मुंबई से मेरे मित्र अमरनाथ कोलकाता आए हुए थे। उन्होंने मिलने के बारे में पूछा तो मैंने उनसे कहा-ताज होटल में हूँ संजय दत्त के साथ। अमरनाथ जी भी आ गए। संजय से अमरनाथ का परिचय कराया। परिणीता के बाद प्रदीप सरकार की एकाध फिल्म आयी-गयी। एक बार फोन पर बात हुई तो प्रदीप सरकार ने कहा-आपसे बॉलीवुड के बारे में कुछ छिपा नहीं है। मुझे साइड लाइन किया जाता रहा। राजकुमार हिरानी ही विधु विनोद चोपड़ा की पसंद के निर्देशक बने रहे। क्या किया जा सकता है अपनी खेती है, अपनी जागीर!

 सुशांत सिंह राजपूत अपनी हत्या-आत्महत्या कांड के ठीक एक दिन पहले निखिल आडवाणी और रमेश तुरानी जैसे नामचीन निर्देशक-निर्माता के साथ नयी फिल्म को लेकर दो-तीन दौर में लगभग घन्टे भर बात करता है। इन लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा भी कि सुशांत एकदम नार्मल था। अपनी भूमिका को लेकर सवाल-जवाब कर रहा था। उसे स्क्रिप्ट देने पर भी सहमति बनी थी। ऐसे भी कोई आत्महत्या करता है तो? जूस पीकर? उसे किस बिना पर अवसादग्रस्त घोषित करने पर तुले थे बॉलीवुड वाले? बॉलीवुड को जागीर समझने वाले? जो हत्याकांड के पहले सुशांत को अपनी फिल्म में लेने के लिए कोरोना काल में बातचीत कर रहे थे, कहीं वे भी तो अवसादग्रस्त नहीं थे? देख लेना, पता कर लेना जरूरी है?

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