Wednesday, 12 August 2020

सत्ताखोर होने का मतलब "किसी का रेप कर दो फिर शेष कर दो"... तो है नहीं...उठ रहा है बॉलीवुड का गंदा पर्दा...


* निर्भय देवयांश 
  ------------------
सत्ताखोर होने के ढेर सारे फायदे हैं, नुकसान बहुत कम। यहाँ जरूरत से अधिक चमचे मिल जाते हैं। चमचों के हौसले सदा बुलंद रहते हैं। इस वर्ग के लोग किस श्रेणी से आते हैं और किस श्रेणी में रखे जाते हैं, इस बात पर निर्भर करता है कि चमचागिरी का अंदाज कितना निराला है। 

सुशांत सिंह राजपूत बड़ा स्टार था कि बहुत छोटा था कि चर्चा करने लायक न था कि उसकी निर्मम मौत पर बहस नहीं होनी चाहिए, यह किस आधार पर तय होगा? यानी हत्या भी तुम करो, सेक्स भी तुम करो और चर्चा के तरीके का चयन भी तुम्हीं करो। और ज्यादती कि इसी को सिस्टम भी कहना है कि यही जनता का खेवनहार है! अगर सत्ताखोर होने के बहाने इतने सारे कारनामे के अपवित्र अधिकार मिल जाते हैं तो फिर पर्दे के पीछे अब तक जो भी चलता रहा है, बहुत बुरा चलता रहा है। फिर बहुत बुरा और बॉलीवुड के गठजोड़ में फर्क कहाँ रह जाता है? चमचों ने अपनी दुनिया चमकाने के लिए बहुत गंदी दुनिया की अच्छी तारीफ क्यों की होगी? इसके भी कारण छोटे-मोटे तो होंगे नहीं! चूँकि चमचे ऊपर से नीचे तक फिट हैं इसलिए वे जत्थे में हमलावर होते हैं। उनके पास बाजार की चमकीली बेहयाई भाषा होती है। एक तरह से भाषा पर ऐसा नियंत्रण होता है कि उनके सारे तर्क कम समझदार लोगों को स्पंदित करने के लिए काफी होते हैं। इसी से उनका घर चलता है। शहर-दर-शहर ठिकाना होता है। रात की ऐय्याशियां और दिन भर की कमीनगी! सब मिल कर एक ऐसा दृश्य रचते हैं कि हत्यारे और बलात्कारी भी यहाँ निफ्रिक दिखता है। हत्यारे और बलात्कारी को अपने चमचे पर यकीन होता है कि मजा लूटने के बाद थोड़ी-सी जिस्मखोरी इनके हिस्से में छोड़ दी  जाएगी।  

बलात्कारी और हत्यारा जब तय करने लगे कि उसे सजा भी उसकी शर्त पर मिलनी चाहिए तो स्पष्ट है कि वे अपने मंसूबों में बार-बार कामयाब होंगे। कभी दिव्या भारती, कभी जिया खान, कभी दिशा सालियन तो कभी सुशांत सिंह राजपूत हादसों के मामूली शिकार भर बताए जाते रहेंगे? आखिर हवस की पूर्ति ही तो करनी है और वह भी आउटसाइडर के साथ? जो पहले से सिस्टम में आउटसाइडर है उसका साथ भी आखिर कौन देगा और क्योंकर देगा? यह सवाल उन सभी के लिए है जो चमचे नहीं हैं, जो सत्ता के करीब नहीं हैं? कौन कह सकता है कि चमचे की बहू- बेटियाँ अर्से तक सुरक्षित रहेंगी और चश्मदीद गवाह चमचे अपनी बारी आने पर सुशांत सिंह राजपूत न बना दिए जाएंगे और उनकी बहू-बेटियाँ दिशा सालियन, दिव्या भारती, जिया खान?

इसलिए समय रहते चमचों खतरे को भांप लो। पाप को पाप ही कहो। ऐसा कर न तुम खुद को बचा लोगे बल्कि पर्दे पर बदल रहे दृश्यों के बहाने जो ठगे जा रहे हैं, उन्हें भी सच के करीब लाया जा सकता है। वर्ना सुशांत की मौत दिशाहीन (दिशा सालियन) होगी और इसमें किसी प्रकार की दिव्यता (दिव्या भारती) न होगी। 

                                     ***



 

No comments:

Post a Comment