* निर्भय देवयांश
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बेचारा राज्य
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हिंदुस्तान में बिहार बेचारा राज्य है
दिल्ली वाले, मुंबई वाले कभी इस पर बैठकर
बातचीत नहीं करते कि
बिहार को किस परिस्थितियों ने
बेचारा, लाचार, असहाय
निष्प्राण राज्य की संज्ञा दिला दी
आज तो हालत और भी खराब है
दूसरे राज्य के लोगों के कानों तक
जैसे ही किसी बिहारी की आवाज सुनायी पड़ी
लोग भागने लगते हैं
अफरा-तफरी मच जाती है
ऐसा कुछ होने लगता है
ये लोग इतने परेशान हो जाते हैं
कि जैसे बिहारी कोई अछूत है
और उसके स्पर्श मात्र से
उनकी बिसात मिट जाएगी
यह बात कुछ हद तक सही है
हिंसा की खेती करता है बिहार
और फसल पहुंचती है
दिल्ली दरबार में।
*संगीन के साये में लोकतंत्र* कविता-संग्रह से
नोट::1990 के दशक में 1989 से 1996 तक मुंबई यानी बॉलीवुड की स्याह दुनिया में दर-दर ठोकर खाने के बाद लगभग 25 साल पहले यह कविता लिखी थी। मुंबई के बाद महीनों तक दिल्ली में भी भटकता रहा था। बिहारी को लेकर जो कटु अनुभव दिखे, तभी यह महसूस हुआ था कि आखिर कोई राज्य और उसके निवासी इतने लाचार और बेचारे कैसे हो सकते हैं? सुशांत सिंह राजपूत हत्याकांड के बाद या विभिन्न राज्यों में हो रहे बिहारियों पर अत्याचार के बाद ये सवाल सुरसा मुँह की तरह हमारे सामने खड़े हैं?
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